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सदन में तमाशे , बिहार पे निशाना

Posted On: 17 Aug, 2015 Others में

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तो स्वतंत्रता दिवस जा चुका है और संसद का सत्र भी स्वाहा हो चुका है, उधर बिहार में NDA रहित शेष पार्टियों के गठबंधन की सीटों का बाँट भी निर्णायक स्थिति में है|
हर कोई ही ये जानता है कि दोनों घटनाएं आपस में पूर्णतः मिली हुई हैं | संसद सत्र के तीसरे चौथे दिन ही यह स्पष्ट हो चुका था की अब कांग्रेस बिहार चुनाव लड़ने नही जा रही, साफ़ था कि देश की रही सही विपक्षी पार्टी ठीक राज्य चुनाव से पहले अपनी छवि क्यों मिटटी में मिला रही है? संसद सत्र समाप्त होते ही यह भी घोषित हो गया कि संसद में बेशर्म नाच करने का कारण यही था |
तो क्या अब ये समझा जाए कि यदि चुनाव एक आवश्यकता न हो तो कांग्रेस से किसी प्रकार की सभ्यता या देशहित वाली सोच की उम्मीद रखना बेकार है ? ये बात सोचनीय है |
दूसरी तरफ लालू ने एक बार कहा था कि वे विष पी रहे हैं, दरअसल विष लालू या नितीश नही बल्कि कांग्रेस ने पिया है, कुल 40 सीटों पर अपनी दावेदारी आजमाने का निर्णय कर, ये नया नही है इससे पहले दिल्ली चुनाव में कांग्रेस ,केजरीवाल को अप्रत्यक्ष रूप से वाकओवर दे चुकी है , हालांकि सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार औपचारिकता के लिए खड़े किये गए थे | नतीजा कुछ भी हो मगर लक्ष्य बस यही है कि मोदी को रोक लिया जाए, दिल्ली चुनाव में भाजपा सब जानते हुए भी असहाय थी, दिखने को विपक्ष कई थे मगर मैदान में सब एक होकर लड़ रहे थे |
बिहार में ये प्रयोग कांग्रेस दोबारा दोहराना चाहती है मगर इस बार खुले तौर पर हथियार डाल कर|| इसमें कोई शक नहीं कि कांग्रेस बिना मैदान में आये लड़ रही है, पर ये तय है कि मोदी हारें या जीतें, कांग्रेस अपने अंतिम समय में है | पूरा देश देख रहा है कि सबसे बड़ी पार्टी रह चुकी कांग्रेस किस तरह क्षेत्रीय दलों की जी हुज़ूरी करने तक आती जा रही है , उसके प्रयोग आत्महत्या जैसे हैं, संसद में अपनी छवि ख़राब की खुद दलदल में घुसी और मोदी पर कीचड डाला, ताकि विकल्प के रूप में नितीश और लालू को फायदा मिले | गहरी राजनीति है मगर है निम्न स्तर की|
इन प्रयोगों से कांग्रेस ने जो उत्तर प्रदेश चुनावों में वापसी करने के ख्वाब पाल रखे हैं वे पूरी तरह ध्वस्त होते दिख रहे हैं, कांग्रेस इस समय उस आत्मघाती शत्रु की तरह है जो सामने वाले को क्षति पहुंचाने के लिए अपना चरित्र, मान, सीमाएं, जीवन तक ताक पर रख देता है| अब बस देखना ये है कि इसका परिणाम क्या होता है|

-पुष्यमित्र उपाध्याय
एटा

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